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शनिवार, 8 जून 2019

पनाहों में चली आ

रस्मो-रिवाज़ छोड़ के चाहों में चली आ
ऐ हुश्न मेंरे इश्क़ की  बाहों में चली आ

मंज़िल को ढूँढ लेंगे मेंरे आपके क़दम
उल्फ़त की मेरी जान राहों में चली आ

रख लूँगा छुपा के तुझे दुनियाँ की नज़र से
दिल में है निहाँ मेरी निग़ाहों में चली आ

भर दे मेरे दामन में मायूसियाँ  अपनी
दे दर्द सभी अपने---पनाहों  में चली आ




Amit Kumar Shukla
  Gorakhpur UP
Mob : 8052402445

2 टिप्‍पणियां:

JusticeForTwinkle

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