रस्मो-रिवाज़ छोड़ के चाहों में चली आ
ऐ हुश्न मेंरे इश्क़ की बाहों में चली आ
मंज़िल को ढूँढ लेंगे मेंरे आपके क़दम
उल्फ़त की मेरी जान राहों में चली आ
रख लूँगा छुपा के तुझे दुनियाँ की नज़र से
दिल में है निहाँ मेरी निग़ाहों में चली आ
भर दे मेरे दामन में मायूसियाँ अपनी
दे दर्द सभी अपने---पनाहों में चली आ
Amit Kumar Shukla
Gorakhpur UP
Mob : 8052402445
ऐ हुश्न मेंरे इश्क़ की बाहों में चली आ
मंज़िल को ढूँढ लेंगे मेंरे आपके क़दम
उल्फ़त की मेरी जान राहों में चली आ
रख लूँगा छुपा के तुझे दुनियाँ की नज़र से
दिल में है निहाँ मेरी निग़ाहों में चली आ
भर दे मेरे दामन में मायूसियाँ अपनी
दे दर्द सभी अपने---पनाहों में चली आ
Amit Kumar Shukla
Gorakhpur UP
Mob : 8052402445
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जवाब देंहटाएंआपने बहुत अच्छा लिखा है
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